🔆 [जय गौर हरि] 🔆
▪ [उन्मादिनी यशोदा-94] ▪
🔅विशुद्ध सकाम उपासना ब्रज मेँ तो कोई निष्काम है नहीँ और न निष्कामता का दम्भ करता है। यह दूसरी बात है कि ब्रज की इस सकामता की समता सृष्टि मेँ नही है। कोई निष्कामता या पूर्णता इसका सौवाँ भाग भी नहीँ हो पाती है।
▪एकमात्र कामना ब्रज के जन-जन की--'कन्हैया सकुशल रहे। प्रसन्न रहे।' प्रत्येक ह्रदय इसी आवेग मेँ धड़कता है। प्रत्येक श्वास यही माँगती-पुकारती है। केवल निष्क्रिय कामना नहीँ, जीवित, अत्यन्त सक्रिय कामना। इस कामना ने सभी को उपासक बना रखा है--आर्त,अर्थार्थी उपासक। लेकिन कामना इतनी प्रबल है कि निष्ठा का इसमेँ प्रश्न ही नहीँ उठता। जब किसी के प्राण प्यास से छटपटाते होँ, कूप का पानी या सरिता का, यह प्रश्न उठ सकता है? ब्रज के प्राण छटपटा रहे हैं कन्हैया के प्रेम की प्रबलतम पिपासा से।
🔅ब्रजेश्वरी मईया यशोदा का तो जीवन ही उपासना बन गया है। सुबह से पूजन आरम्भ होता तो समाप्त होने का नाम ही नहीँ लेता।
▪मईया किसका पूजन करती है ?
🔅यह पूछो कि मईया किसका पूजन नहीँ करती है?
▪यह तो चीँटी,बन्दर,बिल्ली,कुत्ते,काक,पशु-पक्षियोँ का,अपने सेवक-सेविकाओं तक का पूजन ही करती है। सबका सत्कार,सबको सन्तुष्ट करने का प्रयत्न करती है। पूजन बुद्धि से,आदर से,श्रद्धा से करती है और कोई कैसे यह पूजन अस्वीकार कर देगा, जब दासियों सेँ अथवा चींटियों तक से कहती है-'मेरे लाल को आशीर्वाद देना।'
🔅'प्रत्येक प्राणी मेँ परमेश्वर' मईया के लिए यह तथ्य इसके अपार वात्सल्य ने प्रत्यक्ष कर रखा है। मईया प्रत्येक का पूजन करती है।
▪ प्राणी-पूजन की बात छोड़ दीजिए। देव पूजन भी कम नहीँ है। सूर्य,यमुना,गायें,वृषभ,तुलसी,नीम देवता हैँ या नहीँ ?अतिथि,ब्राह्मण,कुमारी कन्याएँ तथा सौभाग्यवति महिलाएँ देवता हैँ? मईया का विश्वास शतांश भी मिल जाय तो विश्व देवताओं से ही परिपूर्ण दीखने लगे।
🔄क्रमश:
▪[श्री राधारमणाय समर्पणम्] ▪
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