🔆 [जय गौर हरि] 🔆
▪ [उन्मादिनी यशोदा-95] ▪
🔅 जीवन देवतामय है। देवतेताओं की दया से उनकी गोद मेँ पल रहा है। पृथ्वी देवता,जल देवता,अग्नि देवता,वायु देवता,आकाश देवता। रात्रि मेँ चन्द्र देवता और तारक भी देवता है।
▪भगवान नारायण कुलदेव हैँ। इनका पूजन श्री ब्रजराज प्रतिदिन करते हैं। भगवान शिव का पूजन सविधि करते हैँ। गणपति पूजन के बिना तो कोई पूजन पूरा नहीँ होता। देवी लक्ष्मी,सरस्वति,गौरी का पूजन मईया प्रतिदिन करती है। इनके अतिरिक्त शनिवार को शनि और हनुमान, रविवार को सूर्य,रविवार को सूर्य,सोमवार को चन्द्र तथा शिव,मंगल को भौम.भूमि एवं हनुमान,बुध को केवल बुध ग्रह नहीँ,बुद्धि की देवी सरस्वति भी,गुरु को देवगुरु बृहस्पति,शुक्र को शुक्राचार्य,शुक्रादिदेव वरुण की विशेष पूजा का अवसर आता है।
🔅कालाष्टमी को महाकाली,काल भैरव को पूजित करना है तो सप्तमी ऋषियोँ की है। एकादशी,द्वादशी,प्रदोष,पूर्णिमा,अमावस्या--ऐसी कोई तिथि नहीँ जो किसी देवता की विशेष उपासना-तिथि न हो।
▪मईया को प्रात: ही सूझता है आज उसका व्रत,पूजन करना है। दासियों को,गोपियों को सावधान करना है कि मईया की सोची तिथि या पर्व है भी या नहीँ; किन्तु एकादशी न सही,पञ्चमी हैँ तो यह भी तो पर्व है।
🔅व्रतमयी,आराधनामयी मईया और इसकी आराधना का एक ही लक्ष्य है। देवता भले बदलते होँ,देवताओं के अनुसार उनकी पूजा-पद्धति,पूजा सामग्री मेँ भले अन्तर पड़ता हो,प्रार्थना मेँ देवता की महिमा के शब्द चाहे बदलते है;किन्तु मईया की कामना,याचना एक ही हैँ। इसमेँ कभी परिवर्तन नहीँ आता-'कन्हैया प्रसन्न रहे। आप उस पर कृपा करो!
▪मईया का शरीर कृश होता जा रहा है। इसकी काया क्षण-क्षण छीज रही है;किन्तु अदम्य है इसका उत्साह। अनथक चलती रहती है इसकी आराधना।
🔅'कन्हैया गोचारण करने गया है।' मईया भले इस भावना मेँ मग्न रहे अथवा--कन्हैया ब्रज मेँ नहीँ हैँ,यह तथ्य भीतर दावानल दहकाता रहे,मईया की आराधना थकती-रुकती नहीँ। इनके प्राणों की प्यास---कन्हैया सकुशल रहे।'इसे आराधनामयी बनाये है।
🔄क्रमश:
▪[श्री राधारमणाय समर्पणम्] ▪
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