🔆 [जय गौर हरि] 🔆
▪ [उन्मादिनी यशोदा-10] ▪
📬 कल हमने आस्वादन किया कि " मईया को सुबह का समय तो कलेऊ की प्रस्तुति में व्यस्त रखता है। सबको यही लगता है की कन्हैया वन में है। अब आगे......
🔅मईया दिन के प्रहर मेँ ही छाक सजाने लगी है। छौके मेँ क्या-क्या रखना है,मईया के अतिरिक्त दूसरे किसी को पता भी हो तो मईया इसे मानेगी नहीँ।
▪दाऊ की तो चिन्ता नहीँ,उसे तो जो मिलेगा,भूख लगने पर भरपेट भोजन कर लेता है किन्तु कन्हैया को तो विशेष विशेष पदार्थोँ की भूख लगती है।
🔅मईया ही अनुमान कर पाती है कि आज उनके कन्हैया को क्या रुचेगा।
▪कन्हैया को जब भूख लगी तो मुख उदास करके बैठ जाता है।
🔅यह पूछने का कोई अर्थ नहीँ है 'कन्हैया को काहे की भूख लगी है?' कन्हैया कभी स्वयं भी नहीँ समझता कि उसे काहे की भूख लगी है।
▪दाऊ या भद्र पूछेँगे रोटी खायेगा?
🔅 माखन और रोटी?' बहुत पूछने पर कन्हैया अपनी घुँघराली अलकोँ से मण्डित मस्तक अस्वीकृति से हिला देगा।कन्हैया की भूख समझने की यही पद्धति हैँ।
▪तब फिर पूछना पड़ेगा-'मोदक खायेगा? बड़े मधुर मोदक हैँ।'
🔅बिना देखे ही 'उहुँ,मोदक बासी हैँ और उनमेँ से तो गन्ध आती है।'
▪कन्हैया को जब मोदक खाने की रुचि नहीँ हैँ,तब मोदक मेँ कुछ न कुछ त्रुटि तो होनि चाहिए। कन्हैया मोदक को खट्टे नहीँ बतलाता,यही क्या कम है?
🔄क्रमश:
▪[श्री राधारमणायो समर्पणम्]
🔆▪🔆▪🔅▪🔆▪🔆
No comments:
Post a Comment