🔆 [जय गौर हरि] 🔆
▪ [उन्मादिनी यशोदा-7] ▪
📬 कल हमनें आस्वादन किया की " मईया को लगता है कि कन्हैया अभी आने वाला है और मईया को बहुत कुछ करना है। इस प्रकार मईया के दिन का आरम्भ हुआ करता और यह आरम्भ अब क्रम बन चुका है।अब आगे........
🔅विलम्ब हो गया जीजी! कन्हैया पता नहीँ कहाँ निकल गया?
▪मईया को कहाँ स्मरण रहता है कि माता रोहिणी मथुरा जा चुकी हैँ। कोई भी यह स्मरण नहीँ करवायेगा।
🔅मईया कहती है--'दाऊ भी कन्हैया के साथ ही लगा रहता है।
▪आप दोनो को ढूंढ लाओ। दोनो भूखे भी होंगे।अभी कलेऊ भी नहीँ किया और पता नहीँ कहाँ खेलने मेँ लगे होंगे?'
🔅कोई सेविका यां सखी यदि मईया को कह दे 'कन्हैया अब बड़े हो गये हैँ। गोचारण करने वन मेँ जाते हैँ।' तो यह ऐसा उपाय है,जिससे मईया दिन भर असह्य व्याकुलता से बची रहेँगी और अब सायं गायो के लौटने तक प्रतीक्षा करेँगी।
🔅'कहाँ बड़ा हो गया;किन्तु हठी है।
▪महर भी क्या करेँ, कन्हैया मानता नहीँ हैँ वन मेँ जाये बिना। बछड़े भी नहीँ,बड़ी गायेँ चराने की हठ है कन्हैया को।'
🔅मईया बहुत विवश स्वर मेँ कहती हैँ-'अब बिना कलेऊ किए ही भाग गया और आज तो गोष्ठ से भवन मेँ तो आया ही नहीँ।
▪मैँ कितना हाथ जोड़ती,पैर पड़ती हूँ गोपियो के कि वे बालको को इतनी सुबह यहाँ न आने दिया करेँ,लेकिन वे बेचारी भी क्या करेँ, ना तो दाऊ मानता है ना ही कन्हैया। दोनोँ उठते ही दौड़ जाते हैँ।'
🔅'दोनो को घर के कलेऊ के स्थान पर वन के कन्द-मूल फल प्रिय लगते हैँ।'
▪ गोपियाँ कहती हैँ मईया को नही बहलाना है,क्योँकि अकेली मईया ही तो उन्मादिनी नहीँ हो गयी है यहाँ तो पूरा ब्रज पागल हो गया है।
🔅किसी को भी स्मरण नहीँ रहता है कि कन्हैया उनके मध्य नहीँ हैँ।
🔄क्रमश:
▪[श्री राधारमणायो समर्पणम्]
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