🔆 [जय गौर हरि] 🔆
▪ [उन्मादिनी यशोदा-91] ◾
🔅विशेष पर्व भी प्रत्येक दिन पहुँचे रहते हैँ,ऐसा विचित्र विधान है। मईया को शीतकाल मेँ भी पर्व पर यमुना-स्नान ही करना है और ये पर्व ऐसे है कि सब मनाओ तो एक दिन कई -कई हैँ।
▪वैशाख,श्रावण,कार्तिक,मार्गशीर्ष,माघ यह पूरे मास प्रात: स्नान के पर्व है। सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी ग्रह का है,प्रत्येक तिथि किसी देवता की है। इसके अतिरिक्त विशेष पर्व से रिक्त कोई दिन नहीँ। मईया के विशेष पर्व और भी अधिक हैँ। कभी उनके कन्हैया की जन्मतिथि है,कभी जन्मनक्षत्र है। कन्हैया की न हो तो दाऊ की,श्री ब्रजराज की,भद्र की, तोक की किसी-न किसी के निमित्त विशेष पर्व है।
🔅पर्व है तो प्रात: सूर्योदय से पूर्व यमुनास्नान भी करना ही है। मईया उठते ही चिन्ता करती--'मेरे कन्हैया को ठंड लग जायगी।'
▪सेविकाओँ को अनेक बार याद कराना पड़ता है--आपका लाल अब बड़ा हो गये हैँ। मईया को तो यही लगता रहता है कि उनका कन्हैया अभी स्तनपान ही करता है। बाबा के साथ वह स्नान करने चला गया? मईया यमुना तट पहुचँकर पुकारती--'कन्हैया! दाऊ!'
🔅अब मईया को स्मरण आता है कि उनका अंकधन तो ब्रज मेँ ही नहीँ है। मेरा लाल यहीँ पुलिन पर खेलता था। उसे इस कालिन्दी मेँ स्नान करना बहुत प्रिय लगता था। सखाओँ के साथ पानी उछालते जल से निकलना ही नहीँ चाहता था।
🔄क्रमश:
▪[श्री राधारमणाय समर्पणम्] ▪
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