Monday, 9 November 2015

unmadini yashoda 8

🔆            [जय गौर हरि]            🔆
▪        [उन्मादिनी यशोदा-8]      ▪

📬 कल हमनें आस्वादन किया कि "अकेली मईया ही उन्मादिनी नही हुई यहाँ तो पूरा ब्रज पागल हो गया है। किसी को भी स्मरण नही रहता कि उनके मध्य नहीं है।अब आगे........

🔅सबको यही लगता है कि उनका कन्हैया आज प्राय: उनके सम्मुख ही गायों के पीछे वन मेँ गया हैँ।

▪'कन्हैया और दाऊ बहुत छोटे है,भूख लगेगी तो कच्चे पक्के फल खा लेँगे!मईया की यह चिन्ता मिटी नहीँ ना कभी मिटने वाली है है!

🔅गायों के थनों मेँ मुख लगाते गायें दूध बहाने लगती है इस बात को कोई अस्वीकार नहीँ कर सकता लेकिन कन्हैया दूध पीना चाहेगा! इसका कोई आश्वासन है?

▪'कन्हैया तो दूध के नाम से ही मुख बना लेता है।'जन्म से ही दूध से पता नहीँ क्योँ उसे अरुचि है।कितने बहाने बनाकर कैसे-फुसलाकर तो मैँ उसे दो घूंट पिला पाती हूँ।'

🔅'लेकिन कामदा के थनों  मेँ मुख लगाकर वे बड़े मजे से घैया पीते हैँ।सेवको ने बार बार देखा है की--'कामदा,नन्दा,श्यामा सब कन्हैया को दूध पिलाती हैँ।'

▪'गौ तो देवता हैँ, कामधेनु हैँ। वह किसी को भी पयपान कराने मेँ हिचकती नहीँ हैँ।

🔅मईया की बात तो सच है कि नंदगाँव मेँ तो कोई ऐसी गाय नहीँ जो थनो से किसी बालक को मुख ना लगाने दे याँ मुख लगाने पर हिलना-हटना चाहती हो।

▪जैसे ही कन्हैया दूध पीने लगे तो गायो के थनो से धारा बहने लगती हैँ।

🔅लेकिन मईया की बात ठीक है-कन्हैया तो खेलता है।गाय के थन को मुख लगाकर मुस्कराता रहेगा।

🔅दूध मुख के दोनो और से कपोलो पर होकर नीचे बहता रहेगा। दूध पीता कहाँ है वह।'

🔄क्रमश:

▪[श्री राधारमणायो समर्पणम्]

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