🔆 [जय गौर हरि] 🔆
▪ [उन्मादिनी यशोदा-16] ▪
📬 कल हमनें आस्वादन किया कि " नन्दबाबा प्रायः दौड़कर भद्र को सम्भालते हैं
और स्वयं भी उसे गोद में लेकर रुदन करने लगते है। लेकिन मईया तो इसी प्रतीक्षा में रहती है मेरे दाऊ-कन्हैया गोदहन करके अभी तक नहीं लौटे। अब आगे.......
🔅बिना आहार एवं निद्रा के तो कोई प्राणी जीवित नहीँ रह सकता, अत: मईया भी कुछ खा लेती है और कुछ क्षण सो लेती है; लेकिन कब सोती है कितना सोती है,यह जानना बहुत कठिन है।
▪कन्हैया जब ब्रज मेँ था,तब भी मईया को निद्रा अल्प क्षण ही आती थी और अब वह क्षण अत्यल्प रह गये हैँ।
🔅भद्र,तोक,तेजस्वी,देवप्रस्थ प्रभृति सब कन्हैया के सखा हैँ और इन सबको प्रतिदिन नन्दभवन आना है। मईया जब तक इन सखाओँ को कुछ खिलाये नहीँ,चैन कहाँ पड़ेगा ?
▪सब बालक जब अपने हाथों से ग्रास उठाकर मईया के मुख मेँ देने लगते हैँ,तब मईया मुख बन्द कर लेती हैँ?
🔅सब बालक बहुत हठी हैँ और कहते है 'मईया जब तक आप नहीँ खायेँगी हम सब भी नहीँ खायेँगेँ। हमेँ तो आपका प्रसाद ही ग्रहण करना है।'
🔅कन्हैया नहीँ हैँ... उसके साथ ही कलेऊ के अभ्यासी, उसके सखा,अब यह नन्हेँ सुकुमार सब सूखते ही जा रहे हैँ।
▪मईया को सब बालक अपने कन्हैया ही लगते है और इन सबको अपनी गोद मेँ बिठाकर कुछ खिलाना चाहती है।
🔅मईया को बालको के आग्रह से स्वयं मुख मेँ कुछ न कुछ डालना पड़ता हैँ।
🔄क्रमश:
▪[श्री राधारमणाय समर्पणम्]
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