🔆 [जय गौर हरि] 🔆
▪ [उन्मादिनी यशोदा-19] ▪
📬 कल हमने आस्वादन किया कि मईया रात्रि में अनेक बार चोंकती है और मन ही मन हँसती है कि मैं भी कितनी पगली हूँ कन्हैया सदा शिशु तो नही रहेगा न। अब अपने बाबा के पास सोने योग्य हो गया है; लेकिन मईया के स्नेह के कारण महर के समीप शयन करने नहीँ जा पाता। अब आगे......
🔅मईया बार-बार महर से आग्रह करती है,आप मथुरा क्योँ नहीँ जाते है?
▪वासुदेव जी आपके अनुरोध से दाऊ को एक बार अवश्य भेज देँगे और बड़े भाई के साथ कन्हैया भी चला आयेगा।'
🔅नन्द बाबा का तो समझाना काम तब आता जब मईया सावधान रहती है क्योँकि मईया को तो स्वंय कही बात ही स्मरण नहीँ रहती।
▪महर की बात सुनकर नन्दबाबा व्याकुल हो जाते हैँ,लेकिन करेँ क्या?
🔅यह कोई अपने हाथ की बात तो हैँ नहीँ।
▪वासुदेव जी मना तो नहीँ करेँगेँ;उनसे कैसे कहा जाय?
🔅 कारागर मेँ उन्होनेँ कितना कष्ट पाया है,उनके 6 पुत्र भी मार दिये गये। कितने वर्षो के पश्चात वासुदेव जी और दुखिया देवेकी जी को अपनेँ पुत्रों का मुख देखने को मिला है और अब ही तो कन्हैया के आने से उनके दिन लौटे हैँ।
▪कोई कैसे कह सकता है अपने पुत्र हमारे साथ भेज देँ?
🔅मथुरा के लोगों ने कंस के शासन मेँ कितना कष्ट भोगा है जिसका कुछ अनुमान भी नहीँ।
▪महाराज उग्रसेन को कितना संकोच होगा यदि मथुरा से कोई कन्हैया को बुलाने चला जाय?
🔅दाऊ-कन्हैया जब गुरुग्रह अध्ययन करने गये थे,जब वहाँ से लौटे तो मगधराज जरासन्ध ने मथुरा पर आक्रमण कर दिया।ब्रज आसपास चारों तरफ से सैनिको,गजो,रथो,से भरा पड़ा है!
▪जिस नगर मेँ कंस के शासन मेँ चारों तरफ असंख्य मानव गज और अश्वों के शव पड़े हों जिसके चारों और रक्त का दलदल मचा हो उस नगर के प्रमुख व्यस्थापक (कन्हैया) को कहीँ बाहर जाने का अवकाश होगा?
🔅नन्द बाबा तो यही सब बार बार मईया को समझाते हैँ।
🔄क्रमश:
▪[श्री राधारमणाय समर्पणम्]
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