Monday, 9 November 2015

unmadini yashoda 49

🔆      [जय गौर हरि]           🔆

▪      [उन्मादिनी यशोदा-49]    ▪

📬 कल हमनें पढ़ा कि "गोपियों में एक गोपी मईया को कह देती है आपके कन्हैया को तो कोई गाय सींग नहीं लगाती। जब कन्हैया यहाँ पहुंच जाये तो सभी गायें अपने नवजात बच्चे को भी छोड़ कर उन्हें ही सूँघती और हुंकार करती है। अब आगे....

🔅मईया भी इस तथ्य से अनजान नहीँ है। वह जानती है कि गायो का उनके लाल पर असीम स्नेह है।

▪मईया हँसती हुई कह देती है-'कन्हैया नवजात बच्चे को उठाकर खड़ा करने मेँ यां उन्हेँ दूध पिलाने की शिक्षा मेँ लगा होगा। सभी मित्र भी उसके वहीँ होगे। वहाँ गायो को मोदक खिलाकर प्रसन्न होता होगा।'

🔅मईया व्यायी गाय के समीप पहुँचकर एक बार ठिठककर खड़ी रह जाती है-'कन्हैया यहाँ नहीँ आया?' लेकिन मईया की सहज श्रद्धा इन्हेँ निष्क्रिय नहीँ रहने देती।

▪ मन बहाना बनाता है-'वह दूसरे किसी के गोष्ठ मेँ, दूसरी किसी गाय के समीप गया होगा। कन्हैया को कोई एक गाय नवजात बच्चे के साथ मिल जाय तो अपना स्नान-भोजन ही भूल जाता है।'

🔅मईया सेवको से कह देती है-'कन्हैया कहाँ है,यह देख आओ।' उन्हे स्वयं तो आज उस गाय का नवजात बच्चे के साथ पूजन करना है। उन्हेँ तो आज जन्मी सभी गायो का सत्कार करना है और कुछ खिलाना है।

▪मईया की वेदना विस्मृत रहती है। इस अवसर पर इनमेँ उत्साह दीखता है,प्रसन्नता दीखती है;किन्तु सदा ऐसा नहीँ होता। अमुक गाय बच्चा देने वाली है,यह सुनते ही महर को ढ़ूँढ़ने लगती है।'

🔅'महर! सुना है कि द्विमुखी गौ का दान बहुत पुण्य-पद् होता है।'

▪मईया तो चाहती है कि अपने गोष्ठ की सब गायेँ बच्चा देते समय दान ही कर दी जायँ। 'कन्हैया के द्वारा इस गौ का दान करा दीजिये।'

🔅ब्रजेश्वर कहते है 'महर! तुम्हारा कन्हैया यहाँ होता तो मैँ स्वयं यही सोचता।'ब्रजेश्वर मस्तक पर हाथ रख लेते हैँ और सिर झुकाकर अश्रु टपकाने लगते है।

🔄क्रमश:

▪[श्री राधारमणाय समर्पणम्]

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